
नई दिल्ली, 8 मार्च। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर राजधानी में आयोजित ‘भारती-नारी से नारायणी’ कार्यक्रम ने महिलाओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के महासपने को साकार करने वाले प्रमुख स्तंभ के रूप में चित्रित किया। राष्ट्र सेविका समिति की अखिल भारतीय सह बौद्धिक प्रमुख लीना रहाणे ने सत्रों में इस महत्व को रेखांकित किया।
मीडिया से बातचीत में रहाणे ने ‘नारी से नारायणी’ अवधारणा को महिलाओं में गरिमा और आत्मगौरव जागृत करने वाला बताया। उन्होंने महिला शिक्षा एवं स्वास्थ्य संबंधी सरकारी योजनाओं के व्यापक क्रियान्वयन पर बल दिया, ताकि समाज की प्रत्येक महिला को लाभ पहुंचे। ‘ये प्रयास अंतिम पंक्ति की महिला तक पहुंचने चाहिए,’ उन्होंने कहा।
रहाणे ने बताया कि इन सत्रों का उद्देश्य महिला-नेतृत्व वाले विकास को बढ़ावा देना है, जो मोदी के 2047 दृष्टिकोण से मेल खाता है। उन्होंने महिलाओं से अपनी शक्ति पहचानने, परिवार के साथ-साथ समाज की जिम्मेदारी उठाने और सकारात्मक माहौल बनाने का आह्वान किया, जिससे सुरक्षित भारत का सपना सच हो।
महिला उद्यमी शशि बुवना ने सभी वर्गों की महिलाओं की चुनौतियों पर चर्चा की। ‘हर स्तर की महिला अलग संघर्ष झेलती है, लेकिन यह मंच एकजुट होकर समाधान सुझा रहा है।’ लक्ष्मी पुरी ने विश्व की महिलाओं को बधाई दी और इस एकत्रीकरण पर गर्व व्यक्त किया। यह आयोजन महिलाओं को राष्ट्र निर्माण की धुरी बनने का संदेश दे गया।