
भारत की सड़कें रोज मौत का तांडव रच रही हैं। हर साल डेढ़ लाख से ज्यादा लोग सड़क हादसों का शिकार हो रहे हैं। ऐसे में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह का महत्व बढ़ जाता है। यह सिर्फ एक सप्ताह नहीं, बल्कि जागरूकता का बड़ा अभियान है।
सड़क परिवहन मंत्रालय के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। 2023 में 4.68 लाख हादसे हुए, जिसमें 1.68 लाख की मौत। दोपहिया वाहन 45 प्रतिशत दुर्घटनाओं में शामिल, पैदल यात्री 20 प्रतिशत। मुख्य कारण: तेज रफ्तार, शराबी ड्राइविंग और जर्जर सड़कें।
हर साल 11 से 17 जनवरी को मनाया जाने वाला यह सप्ताह स्कूलों, कॉलेजों और दफ्तरों में जागरूकता फैलाता है। दिल्ली में पिछले साल अभियान से उल्लंघनों में 15 प्रतिशत कमी आई। तमिलनाडु ने कैमरों से दुर्घटनाएं 22 प्रतिशत घटीं।
उत्तर प्रदेश ने 5,000 ब्लैक स्पॉट ठीक किए। केरल सख्त लाइसेंसिंग से आगे। लेकिन पूरे देश में अभी बहुत कुछ बाकी। आर्थिक नुकसान जीडीपी का 3 प्रतिशत, यानी 6 लाख करोड़ रुपये सालाना।
परिवार बर्बाद हो रहे, बच्चे अनाथ। सरकार को सड़कें बेहतर बनानी होंगी, ड्राइवर ट्रेनिंग अनिवार्य। तकनीक जैसे स्पीड कैमरा, इंटेलिजेंट सिग्नल जरूरी।
नागरिकों की भूमिका अहम: हेलमेट पहनें, सीट बेल्ट बांधें, फोन न चलाएं। यह सप्ताह बदलाव ला सकता है। आइए, सुरक्षित सड़कों का संकल्प लें। भारत की सड़कें कब होंगी मौत-मुक्त?