
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से एक या अधिकतम दो चरणों में मतदान कराने की पुरजोर मांग की है। भाजपा, कांग्रेस और सीपीआई(एम) ने इस मुद्दे पर एकजुट होकर अपनी बात रखी, जबकि सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने इससे असहमति जताई।
राज्य भाजपा ने सोमवार को चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ के समक्ष 16 बिंदुओं वाली अपनी मांग पत्र सौंपा। इसमें प्राथमिकता से कहा गया कि सात-आठ चरणों वाले लंबे चुनावों के बजाय कम समय में एक या दो चरणों में वोटिंग होनी चाहिए। इससे मतदाताओं को राहत मिलेगी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी।
दिन में पहले सीपीआई(एम) और कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडलों ने भी आयोग से यही अपील की। सीपीआई(एम) के राज्य सचिव एमडी सलीम ने कहा कि कम चरणों वाले चुनाव ही लोकतंत्र की सही भावना को मजबूत करेंगे। कांग्रेस नेता प्रदीप भट्टाचार्य ने चरणों के साथ-साथ निष्पक्षता पर बल दिया।
वहीं, टीएमसी के शहरी विकास मंत्री फिरहाद हकीम ने स्पष्ट किया कि उनकी बैठक में चरणों पर चर्चा का विषय ही नहीं था। आयोग ने बताया कि अधिकांश दलों ने कम चरणों का समर्थन किया है और हिंसा रोकने की भी मांग उठी है।
यह मतभेद राजनीतिक रणनीतियों को उजागर करता है। विपक्ष जल्दी चुनाव चाहता है ताकि सत्ता पक्ष के लंबे अभियान का फायदा न हो, जबकि टीएमसी बहु-चरणीय प्रक्रिया को तरजीह दे रही है। आयोग का फैसला चुनावी समर को नई दिशा देगा।