
कोलकाता में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) 2026 को शांतिपूर्ण बनाने के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने कड़ा रुख अपनाया है। सभी जिला मजिस्ट्रेट और जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सुनवाई स्थलों या सरकारी दफ्तरों में कानून-व्यवस्था बिगड़ने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान या अधिकारियों पर हमले की स्थिति में बिना विलंब पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं।
यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के 19 जनवरी 2026 के आदेश पर आधारित है, जिसमें पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया की अनियमितताओं पर याचिकाओं की सुनवाई हुई थी। करीब 1.36 करोड़ मतदाताओं को तार्किक विसंगतियों पर नोटिस मिले थे, जिससे व्यापक असंतोष फैला। अदालत ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए फ्लैग्ड नामों का सार्वजनिक प्रदर्शन, दस्तावेज जमा की सुविधा और सुनवाई में भागीदारी के आदेश दिए।
निर्देशों में स्पष्ट है कि FIR की कॉपी एसपी और सीईओ कार्यालय को भेजी जाए। हिंसा जारी रहने पर सुनवाई अनिश्चितकाल के लिए रुक सकती है, जो केवल सीईओ की अनुमति से चलेगी। FIR में देरी को गंभीर अपराध माना जाएगा।
अप्रैल-मई 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले यह कदम SIR को सुगम बनाने के लिए जरूरी है। ईसीआई इसे संवैधानिक कर्तव्य बता रही है, जबकि टीएमसी ने राजनीतिक साजिश का आरोप लगाया। राज्य में शांति बनाए रखकर मतदाता सूची को शुद्धिकरण सुनिश्चित करना लक्ष्य है।