
मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनावों की रणभेरी बजते ही सियासी हलचल तेज हो गई है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख नेता वारिस पठान ने शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे पर तीखा प्रहार करते हुए उन्हें मुसलमानों का दुश्मन करार दिया है।
एक जनसभा को संबोधित करते हुए पठान ने कहा, ‘उद्धव ठाकरे अब धर्मनिरपेक्षता का ढोंग कर रहे हैं, लेकिन उनकी असलियत सबके सामने है। शिवसेना हमेशा से मुसलमानों की विरोधी रही है।’ उनके बयान से मुंबई की सड़कों पर राजनीतिक बहस छिड़ गई है।
बीएमसी, जो भारत की सबसे अमीर नगर निगमों में शुमार है, 227 वार्डों वाली इस संस्था पर काबिज होना किसी राज्य सरकार के बराबर है। यहां सवा करोड़ आबादी का प्रबंधन होता है, जिसमें सड़क, पानी, सफाई जैसे महत्वपूर्ण काम शामिल हैं।
पठान ने शिवसेना के इतिहास का हवाला देते हुए 1992-93 दंगों और अन्य घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने मुस्लिम समुदाय से अपील की कि एआईएमआईएम को समर्थन देकर ‘मुस्लिम-विरोधी ताकतों’ को करारा जवाब दें।
शिवसेना खेमे ने अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन पार्टी नेता इसे वोटबैंक की राजनीति बता रहे हैं। महाराष्ट्र में ठाकरे-शिंदे गुटों के अलावा बीजेपी, कांग्रेस और अन्य दल भी मैदान में हैं।
चुनाव आयोग ने नफरत भरे बयानों पर नजर रखने के निर्देश जारी किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण को बढ़ावा दे सकता है। मुंबई के विविध मतदाता इस बार क्या फैसला लेंगे, यह देखना दिलचस्प होगा।