
तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक के वन विभाग नीलगिरी बायोस्फीयर रिजर्व में 7 और 8 मार्च को संकटापन्न गिद्धों की व्यापक गणना करेंगे। यह सर्वेक्षण दक्षिण भारत के प्रमुख वन्यजीव क्षेत्रों में इन पक्षियों की स्थिति का सटीक आकलन करेगा, जहां हालिया वर्षों में उनकी संख्या में उत्साहजनक वृद्धि देखी गई है।
टीमें मुदुमलाई, सत्यमंगलम, बांदीपुर, नागरहोल, बीआरटी टाइगर रिजर्व और वायनाड जैसे स्थानों पर तैनात होंगी। प्रत्येक दस्ते में चार सदस्य, जिसमें गिद्ध विशेषज्ञ शामिल होगा, दूरबीन, जीपीएस और कैमरों से लैस होकर उड़ान दिशा, समय और घोंसलों का रिकॉर्ड रखेंगे।
पिछली गणना में 320 से 390 गिद्धों तक संख्या बढ़ी, जिसमें तमिलनाडु में सर्वाधिक 157। मुदुमलाई में मुख्य क्षेत्र में पहला घोंसला मिलना एक मील का पत्थर है, जिसके लिए आठ स्थलों पर निगरानी बढ़ाई गई है। कुल 75 सक्रिय घोंसले दर्ज हुए थे।
नीलगिरी क्षेत्र गिद्धों के लिए महत्वपूर्ण है, जो प्रजनन कॉलोनियों और प्रवासी पक्षियों को आश्रय देता है। भारत की नौ प्रजातियों में से सात यहां पाई जाती हैं, जैसे श्वेतपूंछ, लंबी चोंच और लाल सिर वाले गिद्ध।
यह चौथी समन्वित गणना 4,670 वर्ग किमी में 106 स्थानों पर होगी। आंकड़े संरक्षण रणनीतियों को मजबूत करेंगे, जो विषाक्त दवाओं और आवास ह्रास से जूझ रही इन पक्षियों की रक्षा सुनिश्चित करेंगे। वन्यजीव प्रेमियों में आशा का संचार हो रहा है।