
उदयपुर, 15 फरवरी। सीपीआई(एम) की वरिष्ठ नेता वृंदा करात ने संसद की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार पर विपक्ष को दबाने का आरोप लगाया है। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और केरल चुनावों के बीच उनका यह बयान राजनीतिक हलचल मचा रहा है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष को बोलने का पर्याप्त मौका न मिलने पर करात ने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि भाजपा विपक्ष को केवल वही मुद्दे उठाने देना चाहती है जो उसके हित में हों। महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विषयों पर बहस से जानबूझकर बचा जा रहा है।
संसद की गरिमा को ठेस पहुंच रही है, यह कहते हुए करात ने कार्यवाही में आई गिरावट पर चिंता जताई। विधेयकों पर विस्तृत चर्चा की परंपरा कमजोर हो रही है। सत्र के कम दिन, स्थायी समितियों पर दबाव और गंभीर मुद्दों से परहेज संसदीय लोकतंत्र की जड़ें हिला रहे हैं।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर उन्होंने सरकार की रहस्यमयी रणनीति पर प्रहार किया। यह समझौता एकतरफा लगता है और न संसद को न जनता को इसकी पूरी जानकारी दी गई। डोनाल्ड ट्रंप के बयानों से ही देश को पता चल रहा है। पहले अलग संकेत, फिर पीयूष गोयल का संयुक्त बयान का जिक्र।
टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं पर सहमति बनी तो पूरी डिटेल क्यों नहीं सार्वजनिक? वास्तविक शर्तों को छिपाकर जनता को अंधेरे में रखा जा रहा है, उनका तर्क है।
केरल विधानसभा चुनाव पर करात ने भरोसा जताया। वाम मोर्चा सरकार के कल्याणकारी कार्यों से संतुष्ट जनता लगातार तीसरी बार सत्ता सौंप सकती है। विकास और नीतियों पर वोट पड़ेगा, उन्होंने कहा।
करात का यह हमला संसदीय सुधार, व्यापार पारदर्शिता और राज्य चुनावों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।