
नई दिल्ली में उपराष्ट्रपति निवास पर आयोजित एक गरिमामयी समारोह में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने पूर्व सचिव सुरेंद्र कुमार पचौरी की पुस्तक ‘एम्ब्रोसिया का चैलिस: राम जन्मभूमि-चुनौती और प्रतिक्रिया’ का विमोचन किया। यह कार्यक्रम राम जन्मभूमि के ऐतिहासिक संघर्ष को उजागर करने वाला साबित हुआ।
अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने पुस्तक की सराहना की जो सदियों पुराने इस युद्ध को निष्पक्ष, करुणामय और विद्वतापूर्ण ढंग से चित्रित करती है। उन्होंने अयोध्या के राम मंदिर निर्माण को भारत की सांस्कृतिक गाथा का स्वर्णिम अध्याय बताया जहां आस्था, इतिहास, कानून और लोकतंत्र सम्मानपूर्वक एकजुट हुए।
हजारों मंदिरों के बीच जन्मभूमि पर निर्मित यह मंदिर अद्वितीय है। भगवान राम भारत और भारतीय धर्म की आत्मा हैं। सत्य की सदा विजय होती है, धर्म कभी पराजित नहीं होता। महात्मा गांधी के राम राज्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे न्याय, समता और मर्यादा का प्रतीक कहा।
राम जन्मभूमि की लंबी अदालती लड़ाई दर्दभरी रही लेकिन भारतीय लोकतंत्र की मजबूती दर्शाती है। पूरे देश की आस्था के बावजूद केवल प्रमाणों पर फैसला भारत को लोकतंत्र की मां बनाता है। 2019 का सुप्रीम कोर्ट निर्णय करोड़ों सपनों को साकार कर आत्मसम्मान लौटाया।
इतिहास लेखन में भावनात्मक संयम और सत्यनिष्ठा जरूरी है। पचौरी ने आंदोलन का सार उकेरा है ताकि नई पीढ़ियां बलिदानों को जानें। एएसआई की खुदाई में पुरानी संरचना के प्रमाण मिले जिन्होंने फैसले को मजबूत किया। ट्रस्ट के 3000 करोड़ के क्राउडफंडिंग की प्रशंसा की। उन्होंने अपनी मां की शिलापूजन की याद साझा की।
पीएम मोदी के नेतृत्व में मंदिर पुनरुद्धार परिपक्व लोकतंत्र का प्रतीक है। ध्वजारोहण भावुक क्षण था। राम की अपील अयोध्या से फिजी-अंकोरवाट तक है। उनके जीवन से सद्गुण और हृदयजय सीखें। लेखक को बधाई देते हुए पुस्तक के व्यापक प्रसार की कामना की।