उज्जैन में तैयार की गई विश्व प्रसिद्ध विक्रमादित्य वैदिक घड़ी अब काशी विश्वनाथ धाम की ओर रवाना हो रही है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव स्वयं इस अनूठी घड़ी को बाबा विश्वनाथ के चरणों में अर्पित करेंगे। यह घटना भारतीय संस्कृति और वैज्ञानिक धरोहर के पुनरुद्धार का प्रतीक बनेगी।

प्राचीन काल में राजा विक्रमादित्य द्वारा निर्मित ऐसी ही घड़ियों की कथाएं विख्यात हैं। यह घड़ी बिना बिजली या बैटरी के संचालित होती है, जो सूर्य की किरणों से प्रेरित होकर वैदिक पंचांग के अनुसार समय बताती है। तिथि, नक्षत्र, योग, करण सब कुछ अत्यंत सटीकता से दर्शाती है।
उज्जैन के कुशल कारीगरों और खगोलशास्त्रियों ने वर्षों की मेहनत से इसे तैयार किया है। क्षिप्रा नदी के तट से निकलकर यह पावन गंगा तट पर विराजमान होगी। मंदिर प्रशासन का मानना है कि इससे पूजा-अर्चना के शुभ मुहूर्त निर्धारित करना आसान हो जाएगा।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि यह हमारी वैदिक परंपराओं को आधुनिक रूप देने का प्रयास है। राज्य सरकार अन्य तीर्थस्थलों में भी ऐसी घड़ियां स्थापित करने की योजना बना रही है। लाखों श्रद्धालुओं को इसका लाभ मिलेगा।
घड़ी का डिजाइन प्राचीन वेधशालाओं से प्रेरित है, जिसमें कांस्य के गियर और सूर्य किरणों पर आधारित छाया गणना का उपयोग हुआ है। काशी में इसकी स्थापना से धार्मिक आयोजन अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी होंगे। यह यात्रा न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक एकता का भी संदेश देगी।
