
मध्य प्रदेश का धार्मिक नगरी उज्जैन सम्राट विक्रमादित्य के गौरवगान में डूबने को तैयार है। रविवार से आरंभ होकर 19 मार्च तक चलने वाला यह एक माह से अधिक लंबा विक्रमोत्सव धार्मिक उत्साह, सांस्कृतिक वैभव और व्यापारिक चहल-पहल का अनुपम संगम लेकर आया है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद राज्य सरकार ने इस विशाल आयोजन का विस्तृत कार्यक्रम जारी किया है। उद्घाटन सभी शिवरात्रि मेलों, कलश यात्रा और प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा ‘शिवोहम’ संगीत प्रस्तुति से होगा।
16 से 25 फरवरी तक विक्रम थिएटर महोत्सव में राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय नाट्य दलों की प्रस्तुतियां देखने को मिलेंगी। 26 से 28 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय इतिहास सम्मेलन, कठपुतली उत्सव और शोध संगोष्ठी आयोजित होंगी। विक्रमादित्य युग के न्याय पर बौद्धिक चर्चा 28 फरवरी से 1 मार्च तक चलेगी, उसके बाद 7 मार्च को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन होगा।
मेगा इवेंट में 20 से अधिक देशों की पौराणिक फिल्मों का अंतरराष्ट्रीय महोत्सव, वेद अंताक्षरी और गुड़ी पड़वा पर रामघाट व दत्त अखाड़ा में सूर्योदय पूजा शामिल है। 19 मार्च को वर्ष प्रतिपदा पर उज्जयिनी गौरव दिवस मनाया जाएगा।
शिप्रा तट पर मुख्य समारोह में विक्रमादित्य पुरस्कार वितरण, विक्रम पंचांग 2082-83 का विमोचन, अर्शा भारत का दूसरा संस्करण और नृत्य-नाट्य ‘महादेव की नदी कथा’ होगी।
तैयारी समीक्षा में सीएम यादव ने सम्राट के सभी आयामों को उजागर करने पर बल दिया। उन्होंने नई पीढ़ी को उनके योगदान से जोड़ने और शैक्षणिक संस्थानों को वैज्ञानिक पक्ष पर कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए। यह उत्सव उज्जैन को सांस्कृतिक पुनरुत्थान का केंद्र बनाएगा।