
मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट में मंगलवार को भगोड़े व्यापारी विजय माल्या की याचिकाओं पर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। माल्या के वकील ने अदालत को अवगत कराया कि उनके क्लाइंट इंग्लैंड की अदालतों के आदेशों के कारण भारत वापसी की कोई निश्चित समयसीमा नहीं बता सकते।
मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर तथा न्यायमूर्ति गौतम अनखड़ की बेंच ने माल्या द्वारा फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर घोषित किए जाने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर विचार किया। वरिष्ठ अधिवक्ता अमित देसाई ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार याचिकाकर्ता की अनुपस्थिति में भी सुनवाई संभव है। उन्होंने प्रत्यर्पण प्रक्रिया को कारण बताया।
बेंच ने माल्या की उपस्थिति की मंशा पर सवाल खड़े किए। क्या उन्होंने इंग्लैंड के आदेशों को चुनौती दी, इस पर स्पष्टता न होने पर इसे बहाना माना। सोलिसिटर जनरल तुषार मेहता को हलफनामे पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। सुनवाई के बयानों को शपथपत्र में तब्दील करने को कहा।
2019 से लंबित याचिकाओं पर माल्या की ओर से शीघ्र निपटान के प्रयास न होने पर नाराजगी जताई। तीन सप्ताह का समय देकर 11 मार्च को अगली सुनवाई तय की।
किंगफिशर एयरलाइंस के हजारों करोड़ के कर्ज के कारण माल्या पर भगोड़ा का टैग लगा है। बैंकों की रिकवरी प्रयासों के बीच यह सुनवाई माल्या के भागने की जंग को नई दिशा दे सकती है। केंद्र सरकार का जवाब तय करेगा आगे का रास्ता।