
नई दिल्ली। विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने मंगलवार को सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट साझा कर देश में मुस्लिम जनसंख्या के तेजी से बढ़ते आंकड़ों पर चिंता जताई है। उनके अनुसार, पिछले छह दशकों में हुई जनसांख्यिकीय तब्दीलियां राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरे की घंटी बजा रही हैं।
बंसल ने एक मुस्लिम नेता के बयान का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने बड़े परिवारों की वकालत की, जिसमें आठ संतानें, भाई के सोलह बच्चे और 97 वर्षीय मां के 72 पोते-पोतियां शामिल हैं। ‘हम दो-तीन से संतुष्ट नहीं, बल्कि दर्जनों पर चलें,’ जैसा बयान कट्टर विचारधाराओं को हवा दे रहा है, जो जनसंख्या जिहाद की याद दिलाता है।
1951 से 2011 तक भारत की कुल आबादी 36 करोड़ से बढ़कर 121 करोड़ हो गई, लेकिन मुस्लिम जनसंख्या 3.4 करोड़ से 17.2 करोड़ पहुंच गई—यानी पांच गुना वृद्धि। उनका अनुपात 9.8% से 14.2% हो गया, जबकि हिंदू हिस्सा 84.1% से घटकर 79.8% रह गया। सीमावर्ती 200 जिलों, 300 तहसीलों में उलटफेर हुआ, 116 गांवों में मुस्लिम बहुमत हो गया और 9 राज्यों में हिंदू अल्पसंख्यक।
इसे बंसल ने हिंसा, लव जिहाद, धर्मांतरण, घुसपैठ और साजिशों का परिणाम बताया, जिसमें कांग्रेस जैसी सरकारों की भूमिका भी रही। हिंदू समाज के लिए सुझाव देते हुए उन्होंने 19-25 वर्ष वालों को शादी के लिए प्रोत्साहित करने और कम से कम तीन संतानों पर जोर दिया, ताकि युवा-वृद्ध संतुलन बना रहे।
मुस्लिम महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि बुर्का, हलाला जैसी कुरीतियां उन्हें पैदाइश मशीन बना रही हैं। जब भारत की बेटियां फाइटर जेट उड़ा रही हैं, तो कट्टरता उन्हें पीछे धकेल रही है। अधिकारों के प्रति सजगता जरूरी है। यह मुद्दा चुनावी राज्यो में गरमाया तो है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर विचारणीय है।