
वाराणसी, जिसे काशी या बनारस के नाम से जाना जाता है, दुनिया का सबसे प्राचीन जीवित शहर है। गंगा तट पर बसा यह हिंदुओं का प्रमुख तीर्थस्थल शिव की नगरी के रूप में विख्यात है। काशी विश्वनाथ मंदिर की भव्यता और गंगा आरती की मनमोहक छटा पर्यटकों को बरबस आकर्षित करती है। ज्ञान-आध्यात्म, संगीत, कला और संस्कृति का केंद्र बनारस अपने घाटों, साड़ियों तथा पान के लिए भी प्रसिद्ध है।
यहां हर गली में मंदिर होने की मान्यता है, जिसके कारण काशी को मंदिरों का शहर कहा जाता है। इन्हीं में शुमार है सोमेश्वर महादेव मंदिर, जो काशी के हृदय में स्थित प्राचीन शिव धाम है। लगभग हजार वर्ष पुराना यह मंदिर कभी सनातन धर्म का प्रमुख केंद्र था, जहां भक्त दूर-दूर से दर्शन के लिए उमड़ते थे।
लेकिन आज यह मंदिर जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है। छत गिरने का खतरा मंडरा रहा है, रास्ता खंडहरों जैसा खतरनाक हो चुका है। मंदिर में सफेद संगमरमर का शिवलिंग और उसके समक्ष नंदी की प्रतिमा विराजमान है। साथ ही हनुमान जी का दुर्लभ रूप राम-लक्ष्मण को कंधों पर लिये हुए है।
स्कंद पुराण में भी इसका उल्लेख मिलता है, जो इसकी प्राचीनता को प्रमाणित करता है। काशी की इस धरोहर को बचाने के लिए तत्काल प्रयास आवश्यक हैं। यदि समय रहते संरक्षण न किया गया तो यह ऐतिहासिक धरोहर हमेशा के लिए खो जाएगी। स्थानीय प्रशासन और भक्तों को एकजुट होकर इसकी बहाली करनी होगी।