
गुजरात की औद्योगिक नगरी वापी में बजट की घड़ी सांसे थामे खड़ी है। ट्रंप टैरिफ की मार झेल रहे यहां के 10 हजार से अधिक उद्योग, खासकर केमिकल, फार्मा और पेपर क्षेत्र, सरकारी राहत की बाट जोह रहे हैं। निर्यात से अरबों की कमाई करने वाले ये कारोबार वैश्विक अनिश्चितताओं से जूझ रहे हैं।
वापी इंडस्ट्री एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश पटेल ने कहा कि यह क्षेत्र मुख्यतः एमएसएमई पर आधारित है। बजट में निर्यात प्रोत्साहन के ठोस उपायों की उम्मीद है, जो 2047 के विकसित भारत लक्ष्य को मजबूत करेंगे। छोटे उद्योगों को बल देने वाली नीतियां जरूरी हैं।
फार्मा उद्योगपति प्रकाश भद्रा ने आरएंडडी पर 200 प्रतिशत छूट बहाल करने की मांग की, जो दो साल से बंद है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में निवेश को इंसेंटिव और चीन-टैरिफ प्रभावित उत्पादन के लिए सब्सिडी की जरूरत बताई।
वापी फार्मा हब है, जहां भारत की वैश्विक नेतृत्व वाली हिस्सेदारी मजबूत हो। कमल वशी ने फार्मास्यूटिकल मंत्रालय गठन, जीएसटी रिफंड सरलीकरण और वन विंडो सिस्टम की अपील की। इससे निर्यात बढ़ेगा और नए निवेश आएंगे।
बजट में एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट नीतियों का सरलीकरण वापी को नई उड़ान दे सकता है। आत्मनिर्भरता के दौर में ये कदम उद्योगों को वैश्विक चुनौतियों से लड़ने की ताकत देंगे।