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वन्दे मातरम्: 150 साल का 'मंत्र', 'ऊर्जा', 'सपना' - पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के राष्ट्रीय गीत 'वन्दे मातरम्' के 150 वर्ष पूरे होने पर इसे 'मंत्र, ऊर्जा, सपना और संकल्प' करार दिया। नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम में आयोजित एक भव्य...

Lok Shakti
Lok Shaktiसंवाददाता (Reporter)
|भारत|
November 6, 2025
वन्दे मातरम्: 150 साल का 'मंत्र', 'ऊर्जा', 'सपना' - पीएम मोदी
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के राष्ट्रीय गीत 'वन्दे मातरम्' के 150 वर्ष पूरे होने पर इसे 'मंत्र, ऊर्जा, सपना और संकल्प' करार दिया। नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में बोलते हुए, पीएम मोदी ने कहा कि 'वन्दे मातरम्' के बोल मातृभूमि के प्रति भक्ति और आराधना का प्रतीक हैं और यह गीत पीढ़ियों से देशभक्ति और गर्व की भावना से प्रेरित करता आ रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा, "वन्दे मातरम्, ये शब्द एक मंत्र हैं, एक ऊर्जा हैं, एक सपना हैं, एक संकल्प हैं। वन्दे मातरम्, ये शब्द माँ भारती के प्रति समर्पण और आराधना हैं। वन्दे मातरम्, ये शब्द हमें इतिहास में ले जाते हैं, वे हमारे वर्तमान को नए आत्मविश्वास से भर देते हैं, और वे हमारे भविष्य को यह नया साहस देते हैं कि कोई भी संकल्प ऐसा नहीं है जिसे पूरा न किया जा सके, कोई भी लक्ष्य ऐसा नहीं है जिसे हम, भारतवासी, प्राप्त न कर सकें।"

'वन्दे मातरम्' के सामूहिक गायन को 'अभिव्यक्ति से परे का अनुभव' बताते हुए पीएम मोदी ने कहा, "इतनी आवाज़ों में, एक लय, एक सुर, एक भावना, वही जोश और प्रवाह, ऐसी ऊर्जा, ऐसी लहर, जिसने हृदय को स्पंदित कर दिया। यह 'वन्दे मातरम्' के सामूहिक गान का शानदार अनुभव वास्तव में अवर्णनीय है।"

7 नवंबर को एक 'ऐतिहासिक दिन' बताते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि 'वन्दे मातरम्' के 150 वर्ष का उत्सव हर भारतीय में नया जोश भरेगा। उन्होंने इस गीत के आदर्शों को समर्पित स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की।

इस अवसर पर, प्रधानमंत्री ने 'वन्दे मातरम्' के 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में एक स्मारक डाक टिकट और सिक्का भी जारी किया। उन्होंने एक विशेष पोर्टल भी लॉन्च किया। पूरे देश में सार्वजनिक स्थानों पर 'वन्दे मातरम्' के पूर्ण संस्करण का सामूहिक गायन हुआ, जिसमें समाज के सभी वर्गों के नागरिकों ने भाग लिया।

यह कार्यक्रम 7 नवंबर 2025 से 7 नवंबर 2026 तक चलने वाले राष्ट्रव्यापी स्मरणोत्सव का औपचारिक शुभारंभ है, जो इस कालजयी रचना के 150 वर्ष मना रहा है, जिसने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को प्रेरित किया और राष्ट्रीय गौरव तथा एकता की भावना को प्रज्वलित किया। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा 1876 में रचित 'वन्दे मातरम्' गीत 1882 में उनके उपन्यास 'आनंदमठ' में शामिल किया गया था और भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भारतीय राष्ट्रवाद का प्रतीक बन गया।

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