
तमिलनाडु के कोयंबटूर और तिरुपुर, जो कपड़ा उद्योग का केंद्र हैं, अमेरिकी टैरिफ के कारण गहरे संकट से जूझ रहे हैं। निर्यात में भारी गिरावट आने से हजारों मजदूर बेरोजगार हो गए हैं और कई कारखाने बंद हो चुके हैं।
उद्योग संगठनों के अनुसार, अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ ने भारतीय परिधानों के निर्यात को 30 प्रतिशत से अधिक कम कर दिया है। छोटे-मध्यम उद्यम, जो इस क्षेत्र की रीढ़ हैं, सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। तिरुपुर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा, ‘हमारा 40 प्रतिशत कारोबार अमेरिका पर निर्भर था, अब इकाइयां आधी क्षमता पर चल रही हैं।’
इस संकट ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाई है। बिहार, उत्तर प्रदेश से आए प्रवासी मजदूर बेरोजगार होकर लौट रहे हैं। सड़क किनारे ठेले, परिवहन और सहायक व्यवसाय भी मंदी की चपेट में हैं।
यूरोप और मध्य पूर्व के बाजारों में विविधीकरण की कोशिशें हो रही हैं, लेकिन वैश्विक मंदी और बढ़ते लॉजिस्टिक खर्च बाधा बन रहे हैं। सरकार की सब्सिडी और प्रोत्साहन योजनाओं से कुछ राहत मिली है, मगर विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि बिना व्यापार समझौते के हालात बिगड़ सकते हैं।
चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक दल पुनरुद्धार पैकेज का वादा कर रहे हैं, लेकिन उद्योगपति त्वरित समाधान पर भरोसा नहीं कर रहे। यह क्षेत्र, जो लाखों को रोजगार देता है, अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। व्यापार गतिशीलता बदलने पर ही सुधार संभव है।