चैत्र नवरात्रि की धूम में देशभर के मंदिर मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना में रंगे हैं। तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा होती है, जो शांति, सौम्यता और सौभाग्य की देवी हैं। यदि आप उनके दिव्य दर्शन चाहते हैं, तो उत्तर प्रदेश के प्रयागराज और वाराणसी में दो प्राचीन मंदिर ऐसे हैं जहां मां का साक्षात स्वरूप भक्तों को दर्शन देता है। नवरात्रि के तीसरे दिन यहां विशाल अनुष्ठान आयोजित होते हैं।

प्रयागराज के चौक क्षेत्र में स्थित मां क्षेमा माई मंदिर सिद्धपीठ के रूप में विख्यात है। गर्भगृह में मां चंद्रघंटा के मस्तक पर अर्धचंद्र शोभायमान है, किंतु केवल मुख के दर्शन होते हैं। भक्त शारीरिक-मानसिक रोगों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं। तीसरे दिन सेब का विशेष भोग लगाया जाता है, जो मां को अत्यंत प्रिय है। मंदिर में भारी भीड़ उमड़ती है, भजन-कीर्तन की गूंज से वातावरण दिव्य हो जाता है।
वाराणसी की संकरी गलियों में चौक के चंद्रघंटा गली में एक और प्राचीन मंदिर है। यहां एक दर्शन से मां के नौों रूपों का पुण्य प्राप्त होता है। मां जगदम्बा के इस स्वरूप को चंद्रघंटा माना जाता है। तीसरे दिन दूध-मिठाई और पीले फूल चढ़ाए जाते हैं। भक्त सुख-समृद्धि का आशीर्वाद पाते हैं।
ये मंदिर उत्तर प्रदेश की आध्यात्मिक धरोहर के प्रतीक हैं, जो नवरात्रि में लाखों भक्तों को आकर्षित करते हैं। मां की कृपा से जीवन में शांति और उन्नति की कामना सभी करते हैं।
