
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र राज्यपाल के अभिभाषण से शुरू हुआ, लेकिन यह मौका विपक्ष के लिए सरकार पर प्रहार करने का बन गया। बसपा, सपा और कांग्रेस ने अभिभाषण को जनता की वास्तविक समस्याओं से कोसों दूर बताते हुए इसे सत्ताधारी दल की उपलब्धियों का महज प्रचार बताया।
बसपा प्रमुख मायावती ने एक्स पर लिखा कि अभिभाषण में प्रदेश के विकास और सभी वर्गों के कल्याण पर उत्साहजनक बातें होनी चाहिए थीं। लेकिन सरकार की गलत नीतियों से करोड़ों लोग गरीबी, बेरोजगारी और जान-माल तथा धर्म की सुरक्षा की चिंता में जी रहे हैं। राज्यपाल को इन मुद्दों पर सरकार का ध्यानाकर्षण करना चाहिए था, जिससे जनता और विपक्ष को भरोसा मिलता। इसी कमी से अभिभाषण के दौरान हंगामा मचा रहा।
मायावती ने कहा कि जनकल्याण के बड़े दावों पर अमल का कोई ब्योरा नहीं था, जो बजट में शामिल हो।
सपा के शिवपाल सिंह यादव ने इसे भ्रष्टाचारग्रस्त सरकार की झूठी प्रशंसा का उत्सव कहा। कांग्रेस नेत्री आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने 55 पेज के अभिभाषण को झूठे वादों का पुलिंदा बताया। राज्यपाल का पूरा न पढ़ना उपलब्धियों की कागजी सच्चाई दर्शाता है।
मिश्रा ने कानून-व्यवस्था के दावों को खारिज किया—अपराध बढ़े, भ्रष्टाचार कई गुना, पुलिस में लाखों पद रिक्त। मेडिकल कॉलेजों का ढिंढोरा तो पिटा, लेकिन भवन, डॉक्टर, स्टाफ, दवाएं नहीं। किसानों को खाद-बीज देरी से मिले, नीतियां किसानविरोधी।
सत्र से पहले कांग्रेस और इंडिया गठबंधन ने चौधरी चरण सिंह प्रतिमा के पास बेरोजगारी, महंगाई, किसान समस्याओं, स्वास्थ्य व्यवस्था और एसआईआर पर प्रदर्शन किया।
यह शुरुआती टकराव बजट सत्र को गरमाने का संकेत है, जहां विपक्ष जवाबदेही मांगेगा।