
उत्तर प्रदेश में नौ वर्षों के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शासन ने कृषि क्षेत्र को अभूतपूर्व ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने वाली नीतियों ने अन्नदाताओं को सशक्त बना दिया है।
2017 में सत्ता संभालते ही योगी सरकार ने किसान कल्याण को प्राथमिकता दी। सिंचाई के लिए 1.5 लाख करोड़ का निवेश हुआ। सिद्धार्थनगर से बहराइच तक सरयू नहर परियोजना ने लाखों हेक्टेयर भूमि को सिंचित किया।
उत्तर प्रदेश किसान सम्मान निधि योजना के तहत सालाना 12 हजार रुपए सीधे खाते में। धान-गेहूं पर एमएसपी से अधिक दरों पर खरीद सुनिश्चित। इससे किसान आय 60 प्रतिशत बढ़ी।
प्रौद्योगिकी ने खेती बदली। ड्रोन से कीटनाशक छिड़काव, सैटेलाइट से फसल निगरानी, मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड वितरण। 2.5 करोड़ किसान डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े।
फसल विविधीकरण से आलू उत्पादन दोगुना, आम-बेर बागान दोगुने क्षेत्र में। औषधीय पौधों की खेती से 5 हजार करोड़ का निर्यात। मत्स्य पालन में जैव-फ्लॉक प्रौद्योगिकी से उत्पादन तिगुना।
शीतगृह क्षमता 2 करोड़ मीट्रिक टन, प्रसंस्करण इकाइयां 200 नई। इससे 25 प्रतिशत कम उत्पाद बर्बाद। किसानों को पूर्ण मूल्य मिला।
महिला किसानों को प्रशिक्षण, ऋण में प्राथमिकता। स्वयं सहायता समूहों ने 10 हजार वर्मीकम्पोस्ट इकाइयां स्थापित।
आंकड़े गवाही देते हैं – कृषि जीडीपी में 25% वृद्धि, किसान आत्महत्या 70% घटी, ग्रामीण बिजलीकरण 100%। योगी मॉडल पूरे देश के लिए प्रेरणा।
अन्नदाता अब मजबूत आर्थिक स्थिति में। योगी जी की नीतियों ने यूपी को कृषि प्रदेश से कृषि शक्ति बना दिया। आत्मनिर्भर भारत का आधार मजबूत हुआ।