
पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में बसा उलूबेरिया लोकसभा क्षेत्र कोलकाता के जुड़वा शहर का मुख्य प्रवेश द्वार है। 1952 में गठित यह सीटें सात विधानसभा क्षेत्रों—उलूबेरिया पूर्व, उत्तर (एससी), दक्षिण, श्यामपुर, बागनान, अमता और उदयनारायणपुर—को समेटे हुए है। 2011 की जनगणना के मुताबिक यहां 20.52 लाख आबादी है, जिसमें 69.55 प्रतिशत शहरी निवासी हैं। एससी की हिस्सेदारी 19.63 प्रतिशत है। 2017 में 15.41 लाख मतदाता दर्ज थे, जिनकी मुख्य भाषा बंगाली है।
इस क्षेत्र का इतिहास 500 वर्ष पुराना है, जो भुरशुत साम्राज्य से जुड़ा। 1578 में वेनिस यात्री ने बटोर का उल्लेख किया। ब्रिटिश काल में ईस्ट इंडिया कंपनी ने बस्तियां बसाईं। उलूबेरिया-द्वितीय ब्लॉक (72.21 वर्ग किमी) में जूट मिलें, लघु उद्योग और 30 प्रतिशत कृषि निर्भर आबादी है। साक्षरता 78.05 प्रतिशत है।
उलूबेरिया की शान इसके वाद्य यंत्र क्लस्टर हैं—धुलासिमला, रंगमहल आदि में सितार, सरोद, तानपुरा बनते हैं। आजादी के बाद विकसित यह केंद्र देशव्यापी प्रसिद्धि का है।
राजनीति में शुरूआती कांग्रेस से फॉरवर्ड ब्लॉक (1957), फिर सीपीएम का दबदबा (हन्नान मोल्लाह 1980-2004)। 2009 में टीएमसी की सुल्तान अहमद की जीत, फिर सजदा अहमद का 2017, 2019 (6.95 लाख वोट) और 2024 (7.25 लाख, 52%) का जलवा। भाजपा दूसरे नंबर पर रही।
2026 विधानसभा चुनावों की तैयारी में टीएमसी मजबूत, लेकिन भाजपा चुनौती दे रही। SIR सुनवाई में विवाद और केंद्रीय एजेंसियों के आरोपों पर टीएमसी का statewide आंदोलन। उलूबेरिया की सांस्कृतिक-आर्थिक विरासत चुनावी रण को रोचक बनाएगी।