
उज्जैन शहर की पवित्र धरती पर महाकाल और बगलामुखी मंदिरों के मध्य एक अनोखा मंदिर स्थित है, जहां मां प्रत्यंगिरा देवी की पूजा होती है। आश्चर्यजनक रूप से यह मां असुर राजा रावण की कुलदेवी हैं, जिनके दर्शन मात्र से भक्तों को शत्रुओं पर विजय और अजेयता का वरदान मिलता है।
मां का स्वरूप अद्भुत है- सिंह का मुख और देवी का शरीर, जो भगवान नरसिंह की याद दिलाता है। यह रूप मां के अन्य रूपों से कहीं अधिक क्रोधपूर्ण और उग्र है। तंत्र साधना में मां प्रत्यंगिरा को बगलामुखी की भांति शक्तिशाली माना जाता है।
पौराणिक कथा के अनुसार, प्रह्लाद की रक्षा हेतु नरसिंह अवतार लेने के बाद हिरण्यकशिपु वध के बावजूद भगवान का क्रोध शांत न हुआ। देव-असुर भयभीत हो गए। तब मां प्रत्यंगिरा प्रकट हुईं और नरसिंह को शांत किया।
इन्हें निकुंभला देवी का रूप भी कहा जाता है, जिनकी उपासना रावण व मेघनाद ने रामायण काल में युद्ध पूर्व की थी। विजय हेतु विशेष अनुष्ठान किए जाते थे।
भक्त अकाल मृत्यु भय, तंत्र बाधा और शत्रु नाश के लिए यहां आते हैं। विशेष पूजा से नकारात्मक शक्तियां नष्ट होती हैं। तांत्रिक रात्रि अनुष्ठान कर सिद्धियां प्राप्त करते हैं। भैरवगढ़ रोड पर स्थित यह मंदिर उज्जैन की आध्यात्मिक धरोहर का अभिन्न अंग है।