
वाराणसी, 29 जनवरी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की नई गाइडलाइंस ने हिंदू समाज में भूचाल ला दिया है। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इन्हें सनातन धर्म के लिए ‘लड़ो और मरो’ वाली खतरनाक मशीन करार दिया है। उनका कहना है कि ये नियम जातियों के बीच वैमनस्य पैदा कर रहे हैं, जो समाज को तोड़ने का काम करेंगे।
शंकराचार्य के मुताबिक, सनातन परंपरा में जाति व्यवस्था लड़ाई-झगड़े के लिए नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति की जीविका और समाज की स्थिरता सुनिश्चित करने हेतु विकसित हुई थी। लेकिन यूजीसी के इन निर्देशों ने एक जाति को दूसरी के विरुद्ध खड़ा कर दिया है। इससे हिंसा और टकराव अपरिहार्य हो गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे नीतियां पूरे हिंदू समुदाय को विभाजित कर देंगी।
स्वामी जी ने जोरदार अपील की कि इन नियमों का डटकर मुकाबला किया जाए। सवर्ण समाज सड़कों पर उतर आया है, लेकिन अन्य वर्गों को भी जागना होगा। ‘हिंदू समाज का दो टुकड़ों में बंटना कभी स्वीकार्य नहीं,’ उन्होंने कहा। सुप्रीम कोर्ट संविधान की जांच कर सकता है, पर कानून रद्द करना संसद का क्षेत्र है, जैसा गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया।
इसके अलावा, महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार के विमान हादसे पर भी स्वामी जी ने टिप्पणी की। उन्होंने साजिश की आशंकाओं के बीच जांच समिति गठन की मांग की, ताकि सत्य सामने आए और जनता का भ्रम दूर हो।
यह विवाद आरक्षण नीतियों और सांस्कृतिक एकता के बीच गहरे संघर्ष को उजागर करता है। शंकराचार्य की आवाज पूरे देश में गूंज रही है, जो नीति निर्माताओं के समक्ष बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।