
कांग्रेस नेता उदित राज ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी के बयान पर तीखा प्रहार किया है। मदनी ने कहा था कि हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों में कट्टरपंथी विचार वाले लोग मौजूद हैं। इस पर राज ने पलटवार करते हुए कहा कि ऐसी समानता स्थापित करना गलत है।
दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में उदित राज ने स्पष्ट किया, ‘कट्टरता हर समाज में हो सकती है, लेकिन इसका स्वरूप, प्रभाव और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि अलग-अलग है। इसे एक ही तराजू में तौलना उचित नहीं।’ उन्होंने मदनी के बयान को संदर्भ से हटकर बताया।
मदनी का बयान एक सार्वजनिक सभा में आया था, जहां उन्होंने दोनों समुदायों से आत्ममंथन की अपील की। लेकिन राज ने इसे जिम्मेदारी से कन्नी काटने वाला करार दिया। ‘एक तरफ आतंकी हमले, दूसरी तरफ बयानबाजी को बराबर ठहराना भ्रम फैलाता है।’
यह विवाद उस समय भड़का जब सोशल मीडिया पर #उदितराज बनाम #अरशदमदनी ट्रेंड करने लगा। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि आने वाले चुनावों में ऐसे बयान वोट बैंक को प्रभावित कर सकते हैं।
उदित राज, जो दलित नेता के रूप में जानी जाती हैं, ने कांग्रेस के धर्मनिरपेक्ष चेहरे को मजबूत करने की कोशिश की। वहीं जमीयत का मुस्लिम समुदाय में गहरा प्रभाव है।
विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि बयानबाजी से सामाजिक तनाव बढ़ सकता है। राज ने अंत में सकारात्मक सुझाव देते हुए कहा कि शिक्षा और संवाद से ही कट्टरता का मुकाबला हो सकता है।
यह घटना भारत के जटिल सामाजिक परिवेश को उजागर करती है, जहां धर्म और राजनीति का मेल संवेदनशील मुद्दा बना रहता है। आगे क्या मोड़ आएगा, देखना दिलचस्प होगा।