
देहरादून। उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने का एक साल पूरा हो गया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर ड्राफ्ट समिति सदस्य मनु गौड़ ने उत्साह जताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दृढ़ संकल्प से राज्य देश का पहला यूसीसी लागू करने वाला राज्य बना।
गौड़ ने बताया कि तीन साल की मेहनत के बाद 27 जनवरी 2024 को यूसीसी धरातल पर उतरा। इसका उद्देश्य महिलाओं को विवाह, संपत्ति आदि में पूर्ण समानता प्रदान करना था। यूसीसी पोर्टल पर अब तक चार लाख नए विवाह दर्ज हो चुके हैं, जबकि आठ लाख पुराने विवाह भी पंजीकृत किए गए। चार हजार से ज्यादा वसीयतें भी दर्ज हैं, जो इसकी व्यापक स्वीकृति दर्शाते हैं।
आलोचकों का कहना है कि यह केवल विवाह तक सीमित है, लेकिन गौड़ ने खुलासा किया कि पिछले साल 11 बहुविवाह के मामले दर्ज हुए। 54 तीन तलाक प्रयासों को रोका गया, जिससे दर्जनों महिलाओं को राहत मिली। ये आंकड़े आमतौर पर सामने नहीं आते।
लिव-इन संबंधों पर बहस छिड़ी, लेकिन उद्देश्य माता-पिता-बच्चों का संरक्षण था। 162 आवेदनों में 70 को मंजूरी मिली, शेष नियम उल्लंघन पर अस्वीकार। इससे संभावित अपराध टले।
संशोधनों पर गौड़ बोले कि संविधान की तरह यूसीसी को भी वास्तविकता के अनुरूप ढाला गया। लिव-इन कानून उत्तराखंड की पहल है। गोपनीयता के नाम पर विवाह पंजीकरण सर्वोच्च न्यायालय का आदेश है, जो महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। भविष्य में जरूरी बदलाव किए जाएंगे।