
दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में हुए पथराव मामले में नया मोड़ आ गया है। कोर्ट ने पांच आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर दिया है। यह घटना पुरानी दिल्ली के इस संवेदनशील इलाके में हाल ही में हुई थी, जब भीड़ ने पुलिस पर पत्थर फेंके थे।
घटना के दौरान पुलिसकर्मियों पर हमला हुआ और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मामला छोटे विवाद से शुरू होकर हिंसक झड़प में बदल गया। दिल्ली पुलिस ने कई लोगों के खिलाफ दंगा, सार्वजनिक सेवकों पर हमला और दुश्मनी फैलाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
पांचों आरोपी कोर्ट पहुंचे और जमानत की गुहार लगाई। उनके वकीलों ने कहा कि सबूत कमजोर हैं, ज्यादातर सीसीटीवी फुटेज पर निर्भर है जो स्पष्ट नहीं है। उन्होंने मौलिक अधिकारों का हवाला देते हुए तत्काल रिहाई की मांग की।
कोर्ट ने पुलिस को विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। जज ने जांच की निष्पक्षता पर जोर दिया और अगली सुनवाई की तारीख तय कर दी। तुर्कमान गेट, जो 1976 की इमरजेंसी काल की बुल्डोजर कार्रवाई के लिए कुख्यात है, वहां लगातार बुनियादी सुविधाओं की कमी से आक्रोश पनप रहा है।
स्थानीय नेता अवैध बेदखली और गरीबी को हिंसा का कारण बता रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कोर्ट का यह कदम न्यायिक संतुलन बनाए रखने वाला है। पुलिस का जवाब आने पर ही बेल पर फैसला होगा, जो दिल्ली के अन्य मामलों के लिए मिसाल बनेगा।
इलाके में शांति बहाल करने के लिए प्रशासन संवाद की पहल कर रहा है। उम्मीद है कि कानूनी प्रक्रिया से सभी पक्ष संतुष्ट होंगे।