
केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम ने जनस्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने में आदिवासी चिकित्सकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया है। ओडिशा में आयोजित एक स्वास्थ्य सम्मेलन में बोलते हुए उन्होंने कहा कि ये चिकित्सक दूरस्थ और वंचित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को पूरा करते हैं।
आदिवासी डॉक्टरों की खासियत यह है कि वे स्थानीय समुदायों से आते हैं और उनकी संस्कृति तथा स्वास्थ्य समस्याओं की गहरी समझ रखते हैं। मंत्री ने कहा, ‘वे स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाते हैं, जहां सामान्य सुविधाएं विफल हो जाती हैं।’
सरकार द्वारा आदिवासी युवाओं को चिकित्सा शिक्षा में प्रोत्साहित करने के लिए छात्रवृत्ति और आरक्षित सीटें प्रदान की जा रही हैं। यह प्रयास ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे को सशक्त बनाने का हिस्सा है, जहां डॉक्टरों की कमी एक बड़ी समस्या बनी हुई है।
मंत्री ने उन आदिवासी चिकित्सकों के उदाहरण दिए जिन्होंने गांवों के स्वास्थ्य केंद्रों को प्रभावी बनाया है। मातृ मृत्यु दर में कमी और कुपोषण से लड़ाई में उनकी भूमिका सराहनीय है। उन्होंने राज्यों, एनजीओ और केंद्र सरकार से सहयोग की अपील की।
आयुष्मान भारत के तहत सार्वजनिक स्वास्थ्य कवरेज के लक्ष्य में आदिवासी डॉक्टर अग्रणी होंगे। उनकी विशेषज्ञता न केवल सेवाएं बेहतर बनाएगी बल्कि समुदायों में विश्वास भी बढ़ाएगी। लक्षित निवेश से राष्ट्रव्यापी स्वास्थ्य परिणामों में क्रांति संभव है।
