
प्रयागराज से आया एक चौंकाने वाला बयान। किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर ममता कुलकर्णी ने अपने उच्च पद को अब मजाक जैसा बताते हुए त्यागने का संकेत दिया है। आध्यात्मिक जगत में बढ़ते नकली गुरुओं की भरमार से आहत होकर उन्होंने इस पद की गरिमा पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने कहा, ‘आध्यात्मिक यात्रा में उतरने पर कई कड़वी सच्चाइयां सामने आईं। बाहर से पवित्र दिखने वाला संसार अंदर से खोखला है। लोग बिना ज्ञान या आत्मबोध के खुद को महामंडलेश्वर या जगद्गुरु घोषित कर रहे हैं। केवल वस्त्र धारण करने से संत नहीं बनता।’
वेदों और उपनिषदों का हवाला देते हुए उन्होंने आत्मज्ञान की महत्ता बताई। श्वेतकेतु और उद्दालक ऋषि के संवाद का जिक्र कर कहा कि वेदों को कंठस्थ करने मात्र से ज्ञान पूर्ण नहीं होता। आज भी यही हाल है, जहां पदों का महत्त्व लुप्त हो रहा है।
‘दस में से नौ संत झूठे पाए, जो केवल प्रतिष्ठा के पीछे भाग रहे हैं।’ किन्नर अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजय दास पर भी उन्होंने निशाना साधा, जो नृत्य-संगीत को तुच्छ बताते हैं, जबकि शिव का नटराज और कृष्ण की लीलाएं इसके प्रमाण हैं।
अब आंतरिक आवाज उन्हें पद छोड़ने को कह रही है। ‘नकली लोगों के बीच यह पद अर्थहीन है। सत्य के लिए कोई पद या वस्त्र जरूरी नहीं। सच्चा गुरु तपस्वी और अहंकाररहित होता है।’ उनका यह कदम आध्यात्मिक दुनिया में व्यापक बहस छेड़ सकता है।