
आज की तेज-रफ्तार जिंदगी में लोग या तो देर रात जागते हैं या फिर जरूरत से ज्यादा सोते हैं। लेकिन यूनानी चिकित्सा के अनुसार, नींद और जागरण का सही तालमेल स्वास्थ्य की कुंजी है। इसका बिगड़ना कई रोगों को न्योता देता है।
यूनानी मत में नींद शरीर की मरम्मत का सुनहरा समय है। इस दौरान रूह-ए-हयाती सुरक्षित रहकर क्षतिग्रस्त अंगों को ठीक करती है। पाचन संतुलित होता है, मन शांत रहता है और नई ताकत पैदा होती है।
नींद की कमी से शरीर कमजोर पड़ता है, चिड़चिड़ाहट बढ़ती है और बुद्धि भ्रमित हो जाती है।
दूसरी तरफ, अत्यधिक जागरण से शरीर में गर्मी और शुष्कता बढ़ जाती है। इससे सिरदर्द, आंखों में जलन, बेचैनी, मुंह का सूखना और थकान जैसी परेशानियां होती हैं। लंबे समय में नमी की कमी से दुर्बलता और जल्दी बुढ़ापा आता है।
बहुत ज्यादा सोना भी ठंडक और अतिरिक्त नमी पैदा करता है। इससे पाचन शक्ति ढीली पड़ती है, आलस्य घेर लेता है। मोटापा, भारीपन, गैस, बलगम और काम में रुचि न लगना आम हो जाता है।
यूनानी चिकित्सा व्यक्ति के स्वभाव, उम्र और मौसम के अनुसार नींद निर्धारित करने का निर्देश देती है। बच्चों को अधिक, बुजुर्गों को कम। गर्म स्वभाव वालों को हल्की नींद, ठंडे को संयम। रात की नींद और सुबह की ताजगी ही सर्वोत्तम है।
इस प्राचीन ज्ञान को अपनाकर स्वस्थ जीवन जिएं।