
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के जाति-आधारित जनगणना कराने के ऐतिहासिक फैसले का खुलकर स्वागत किया है। चेन्नई में आयोजित एक सार्वजनिक सभा में उन्होंने इसे सामाजिक न्याय की दिशा में बड़ा कदम बताया।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आगामी राष्ट्रीय जनगणना में जातिगत गणना को शामिल करने की मंजूरी दी है। स्टालिन ने कहा कि यह निर्णय लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करता है। तमिलनाडु जैसे राज्य जहां आरक्षण और कल्याण योजनाओं पर विशेष जोर है, वहां यह डेटा क्रांतिकारी साबित होगा।
उन्होंने द्रविड़ आंदोलन की विरासत का हवाला देते हुए कहा कि बिना सटीक आंकड़ों के नीतियां अंधेरे में तीर चलाने जैसी हैं। शिक्षा, रोजगार और गरीबी उन्मूलन में पिछड़े वर्गों के लिए यह जनगणना वरदान सिद्ध होगी।
विपक्ष के कुछ नेताओं ने इसे चुनावी स्टंट करार दिया, लेकिन स्टालिन ने इसे खारिज करते हुए कहा कि आंकड़े किसी का भला या बुरा नहीं करते। उन्होंने केंद्र से पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने की अपील की।
तमिलनाडु में 69 प्रतिशत आरक्षण व्यवस्था वाले राज्य के लिए यह फैसला सशक्तिकरण का नया अध्याय खोलेगा। स्टालिन ने अधिकारियों को राज्य स्तर पर सहयोग की तैयारी करने के निर्देश दिए हैं।
यह निर्णय संघीय ढांचे में एक दुर्लभ सहमति का प्रतीक है। जैसे-जैसे जनगणना की तैयारियां तेज होंगी, राजनीतिक बहसें और तेज होंगी। स्टालिन का समर्थन दर्शाता है कि सामाजिक न्याय के मुद्दे पर राज्य और केंद्र के बीच सामंजस्य संभव है।