
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर तृणमूल कांग्रेस के मुखर नेता कुणाल घोष ने चुनाव आयोग और भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। 4 मार्च को उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के कारण एक मौत हो चुकी है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी भारतीय चुनाव आयोग और भाजपा पर है।
घोष ने दावा किया कि भाजपा के इशारों पर चुनाव आयोग काम कर रहा है और वैध मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी जनता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इस अन्याय के खिलाफ लड़ रही है। पार्टी सड़कों पर उतरी है, अदालतों में लड़ रही है। मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट में भी मामला उठाया है। शुक्रवार से ममता बनर्जी धरना शुरू करने जा रही हैं ताकि असली वोटर्स के नाम हटाने का मुद्दा उजागर हो।
बंगाल को बदनाम करने की भाजपा की साजिश का घोष ने पर्दाफाश किया। अब वे वास्तविक मतदाताओं को गायब कर रहे हैं। चुनावी दीवार लेखन तो बस फोटो खिंचवाने का ढोंग है, क्योंकि भाजपा नेता तो बांग्ला संदेश पढ़ ही नहीं पाते।
अन्य राज्यों से आने वाले भाजपा नेताओं को ‘राजनीतिक पर्यटक’ बताते हुए घोष ने कहा कि उनके पास पैसे और होटल बुकिंग की ताकत है। 2021 में ‘अबकी बार 200 पार’ का नारा लगाया, 77 सीटों पर लड़े, 60 पर सिमट गए। 2023 पंचायत चुनाव में सभी जिला परिषद हार गए।
सीपीआईएम को भाजपा की ‘बी’ टीम करार देते हुए घोष ने कहा कि दोनों के वोट प्रतिशत बराबर हैं। वाम का प्रभाव घटा, भाजपा का थोड़ा बढ़ा, लेकिन टीएमसी हमेशा जनता के साथ। ममता दीदी व अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल मजबूत है। वामपंथी तो घरों में दुबके रहे।