
कोलकाता से उठी राजनीतिक तहलका। तृणमूल कांग्रेस ने पुणे पुलिस के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें पश्चिम बंगाल के प्रवासी मजदूर सुखेन महतो की मौत को नशे की जंग बताया गया। पुरुलिया के इस युवक की सोमवार रात महाराष्ट्र में हुई हत्या ने बंगाली श्रमिकों पर हमलों का मुद्दा फिर गरमा दिया।
पुणे पुलिस ने बृहास्पतिवार को बयान जारी कर कहा कि महतो काम पर जाने के बजाय कोरेगांव क्षेत्र में शराब के नशे में घूम रहा था। वहां दो लोगों से उसका झगड़ा हो गया। शिकरापुर थाने के इंस्पेक्टर दीपरातन गायकवाड़ के मुताबिक, सीसीटीवी में नशे की हालत में बहस दिख रही है, लेकिन हमला कैद नहीं हुआ। बाद में धारदार हथियार से उसकी हत्या कर दी गई।
तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी शुक्रवार को मृतक के पुरुलिया आवास पर पहुंचेंगे। सीएम ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि भाषा, पहचान और जन्मभूमि के कारण युवक को ठुकराकर मार डाला गया।
हालिया महीनों में महाराष्ट्र जैसे भाजपा शासित राज्यों में बंगाल के मजदूरों पर लक्षित हिंसा के आरोप लगे हैं। तृणमूल का कहना है कि पुलिस अपनी साख बचाने को नशे का बहाना बना रही। मृतक परिवार ने भी भाषाई भेदभाव का आरोप लगाया।
यह घटना प्रवासी श्रमिकों की असुरक्षा को उजागर करती है। अभिषेक का दौरा न्याय की मांग को तेज कर सकता है, जबकि पुणे पुलिस अपनी जांच पर अड़ी हुई है। लाखों मजदूरों के लिए सुरक्षा जरूरी।