
पश्चिम बंगाल में राजनीतिक तापमान अचानक चढ़ गया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हालिया छापेमारियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। कोलकाता से लेकर जिलों तक सड़कों पर उतरे टीएमसी कार्यकर्ता नारेबाजी कर रहे हैं और केंद्र सरकार पर हमला बोल रहे हैं। इसी बीच कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने टीएमसी के इस रुख पर तीखे सवाल उठाए हैं, जिससे सियासी घमासान तेज हो गया है।
अधीर रंजन ने पत्रकारों से कहा, ‘ईडी का छापा पड़ते ही इतना हंगामा क्यों? अन्य मामलों में चुप्पी क्यों साध ली जाती है?’ उन्होंने टीएमसी पर पाखंड का आरोप लगाते हुए कहा कि ये प्रदर्शन भ्रष्टाचार के आरोपों से ध्यान भटकाने की कोशिश हैं। ईडी की कार्रवाई नगरीय निकायों के ठेकों में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी है, जहां करोड़ों की अनियमितताएं सामने आई हैं।
टीएमसी नेताओं के ठिकानों पर छापे में नकदी, दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए गए। पार्टी इसे बीजेपी का राजनीतिक षड्यंत्र बता रही है। ममता बनर्जी समर्थक धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं और ईडी कार्यालयों के बाहर नारेबाजी हो रही है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनावी रणनीति का हिस्सा है। अधीर के बयान से विपक्षी एकता को बल मिला है। आने वाले दिनों में और उग्र प्रदर्शन संभव हैं, लेकिन अगर ईडी को पुख्ता सबूत मिले तो टीएमसी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। बंगाल की सियासत में यह नया मोड़ सत्ता और विपक्ष के बीच जंग को और रोचक बना रहा है।