
दिल्ली में राजनीतिक हलचल मच गई जब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसदों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। वेस्ट बंगाल की सत्ताधारी पार्टी के सांसदों ने केंद्र सरकार पर संघवाद को कमजोर करने और विपक्षी दलों को दबाने का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों ने बैनर और पोस्टर लहराते हुए कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जैसी केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग टीएमसी नेताओं के खिलाफ हो रहा है। ‘लोकतंत्र की हत्या बंद करो’, ‘राज्य के अधिकार लौटाओ’ जैसे नारे गूंजते रहे। सुरक्षा बलों ने भारी तैनाती के बीच शांतिपूर्ण प्रदर्शन सुनिश्चित किया।
यह घटना पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों से पहले महत्वपूर्ण है, जहां ममता बनर्जी केंद्र पर हमलावर रुख अपना रही हैं। टीएमसी नेताओं का कहना है कि केंद्र राज्य को उसके हक का पैसा नहीं दे रहा। भाजपा ने इसे सस्ती लोकप्रियता का ढोंग बताया।
प्रदर्शन के दौरान सांसदों ने अमित शाह को ज्ञापन सौंपने की कोशिश की, लेकिन उन्हें रोका गया। इस घटना ने राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे विपक्षी एकता मजबूत हो सकती है।
कुल मिलाकर, यह प्रदर्शन केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव को उजागर करता है और भविष्य की राजनीतिक रणनीतियों को प्रभावित कर सकता है।