
तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष गद्दम प्रसाद कुमार ने सत्तारूढ़ कांग्रेस की दो महत्वपूर्ण याचिकाओं को खारिज कर दिया है, जिनमें बीआरएस के दो विधायकों पी कौशिक रेड्डी और जी महिपाल रेड्डी को अयोग्य घोषित करने की मांग की गई थी। यह फैसला राज्य की राजनीति में चल रही खींचतान के बीच आया है, जो विपक्षी दलों को बड़ी राहत प्रदान करता है।
याचिकाओं का आधार हालिया लोकसभा चुनावों में इन विधायकों द्वारा कथित रूप से कांग्रेस उम्मीदवारों का समर्थन करना था। कांग्रेस विधायकों ने दसवीं अनुसूची का हवाला देते हुए दलील दी कि यह दल-बदल का स्पष्ट मामला है। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने वीडियो साक्ष्य, बयान और कानूनी दावे पेश किए।
अध्यक्ष ने विस्तृत समीक्षा के बाद फैसला सुनाया कि विधायकों के कार्यों से दल-बदल कानून का उल्लंघन सिद्ध नहीं होता। उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत समर्थन व्यक्त करने से स्वतः अयोग्यता नहीं आती, जब तक कि विधानसभा में पार्टी व्हिप का उल्लंघन न हो। ‘यह लोकतंत्र की जीत है,’ बीआरएस नेताओं ने प्रतिक्रिया दी।
कांग्रेस ने फैसले पर नाराजगी जताई और अदालत जाने का संकेत दिया। यह तीसरा ऐसा मामला है जब स्पीकर ने इसी तरह की याचिका खारिज की है। आगामी उपचुनावों और सत्रों के मद्देनजर यह निर्णय राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। तेलंगाना की सियासत में दल-बदल के नियमों की व्याख्या पर नई बहस छिड़ गई है।