
तेलंगाना के डीजीपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को कड़ा संदेश दिया है। चरित्र हनन करने वाली सामग्री को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। राज्य के शीर्ष पुलिस अधिकारी ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरुपयोग अपराधियों को संरक्षण नहीं देगा।
हाल के महीनों में सोशल मीडिया पर फर्जी खबरें और मानहानिकारक पोस्ट्स की बाढ़ आई है। नेता, अधिकारी और आम नागरिक सभी इसके शिकार हो रहे हैं। डीजीपी ने साफ शब्दों में कहा, ‘हम डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को बदनामी का अड्डा नहीं बनने देंगे।’
साइबर क्राइम पुलिस को हाई अलर्ट पर रखा गया है। फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स को तत्काल कार्रवाई करने और सूचना देने का आदेश दिया गया। उल्लंघन पर आईटी एक्ट के तहत सख्त कदम उठाए जाएंगे।
यह कदम पूरे देश में फर्जी खबरों के खिलाफ चल रही मुहिम का हिस्सा है। तेलंगाना में हाल के केसों में भ्रष्टाचार के झूठे आरोप लगाए गए, जिससे सामाजिक तनाव बढ़ा। पीड़ितों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ा है।
विशेषज्ञों ने इस पहल की सराहना की। जन जागरूकता अभियान शुरू हो चुके हैं। रिपोर्टिंग हेल्पलाइन सक्रिय हैं। तेलंगाना डिजिटल सुरक्षा का नया मॉडल बन सकता है।
निष्कर्षतः, जिम्मेदार सोशल मीडिया उपयोग ही स्वस्थ लोकतंत्र की कुंजी है। डीजीपी का संकल्प laudable है।