राज्य विभाजन के दस साल बाद भी सीमाओं का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। तेलंगाना सरकार ने केंद्र को पत्र लिखकर आंध्र प्रदेश में मिलाए गए पांच गांवों – कोथापल्ली, नागलापुरम, कोंडापुरम, नारायणपुरम और चिंतलापुड़ी – की वापसी की मांग की है। इन गांवों का मूल तेलंगाना से जुड़ाव ऐतिहासिक दस्तावेजों से सिद्ध होता है।

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की अगुवाई वाली सरकार ने विस्तृत ज्ञापन सौंपा है, जिसमें राजस्व रिकॉर्ड, मानचित्र और जनसांख्यिकीय आंकड़े शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन गांवों के निवासियों को दोहरी प्रशासनिक व्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है, जो सिंचाई, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित कर रहा है।
2014 के पुनर्गठन अधिनियम के तहत ये गांव अस्थायी रूप से आंध्र को सौंपे गए थे, लेकिन समीक्षा का वादा अधर में लटका हुआ है। आंध्र प्रदेश ने विकास कार्यों का हवाला देकर विरोध जताया है, लेकिन तेलंगाना का तर्क है कि यह उनके क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन है।
स्थानीय किसान कृष्णा नदी के जल बंटवारे से वंचित हैं, जबकि युवा रोजगार के लिए हैदराबाद पलायन कर रहे हैं। आगामी चुनावों से पहले यह मुद्दा राजनीतिक रंग ले चुका है। केंद्र की मध्यस्थता से ही समाधान संभव है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से अन्य सीमा विवादों पर भी असर पड़ेगा। तेलंगाना के लाखों नागरिक इस न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जो संघीय ढांचे की मजबूती का परीक्षण बनेगा।
