
हैदराबाद। तेलंगाना पिछड़ा वर्ग आयोग ने केंद्र सरकार के सामने एक कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि राज्य की 40 पिछड़ी जातियों को केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल किए बिना जनगणना प्रक्रिया शुरू करना उचित नहीं होगा। आयोग के अध्यक्ष जी. निरंजन ने मुख्य सचिव के. रामकृष्ण राव को पत्र लिखकर इस मांग को दोहराया है।
आयोग के अनुसार, राज्य सरकार ने 130 जातियों को पिछड़ा वर्ग का दर्जा दिया है, लेकिन केंद्र की सूची में महज 90 ही शामिल हैं। यदि इसी आधार पर जनगणना हुई, तो 40 जातियां बाहर रह जाएंगी, जिससे पिछड़े वर्गों की वास्तविक आबादी कम आंकी जाएगी।
इससे आरक्षण नीतियों और कल्याण योजनाओं पर बुरा असर पड़ेगा, निरंजन ने चेताया। राज्य और आयोग ने पहले भी केंद्र से मांग की है, लेकिन अब तक कोई फैसला नहीं हुआ।
इधर, 2027 जनगणना की तैयारियां जोरों पर हैं। 11 मई से 9 जून 2026 तक घर-घर सर्वे होगा, उसके बाद फरवरी 2027 में मुख्य गणना। खास बात, एचएलओ से 15 दिन पहले ऑनलाइन स्व-गणना की सुविधा मिलेगी।
मुख्य सचिव ने जिला कलेक्टरों के साथ बैठक में हर क्षेत्र को कवर करने के निर्देश दिए। दूरस्थ गांव, झुग्गी-झोपड़ियां, आदिवासी इलाके—कहीं कोई चूक नहीं होनी चाहिए।
यह दोतरफा तरीका पारदर्शिता बढ़ाएगा। लेकिन ओबीसी सूची का मुद्दा अनसुलझा रहने से जनगणना पर संकट मंडरा रहा है। केंद्र-राज्य के बीच पिछड़े वर्गों को लेकर तनातनी बढ़ती जा रही है।