
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में हाल ही में उठे विवादित नारों ने पूरे देश का ध्यान खींच लिया है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेज प्रताप यादव ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ‘किसी भी पद का सम्मान करना चाहिए, चाहे वह कितना भी विवादास्पद क्यों न हो।’
कैंपस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने ऐसे नारे लगाए जो विभाजन की कड़वी यादें ताजा कर देते हैं। यह घटना वीडियो के जरिए सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई, जिससे राजनीतिक बहस छिड़ गई। तेज प्रताप ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘जेएनयू शिक्षा का मंदिर है, यहां पद का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कुलपति का पद प्रतिष्ठित है।’
विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की गहन जांच का आश्वासन दिया है। छात्र संगठनों का दावा है कि नारे प्रशासनिक उत्पीड़न के खिलाफ विरोध का हिस्सा थे। लेकिन तेज प्रताप का मानना है कि छात्र राजनीति के नाम पर अराजकता फैलाना उचित नहीं।
यह घटना जेएनयू के लंबे विवादित इतिहास का एक और अध्याय जोड़ती है। तेज प्रताप की प्रतिक्रिया ने छात्र आंदोलन और संस्थागत गरिमा के बीच संतुलन की बहस को नई गति दी है। देखना दिलचस्प होगा कि इस मामले का पटाक्षेप कैसे होता है और कैंपस में शांति कैसे बहाल होती है।