
प्रयागराज में एक गंभीर यौन उत्पीड़न मामले ने तूल पकड़ लिया है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने नाबालिग लड़कों के साथ कथित शोषण के आरोपों में गिरफ्तारी से बचने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की है। जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की सिंगल बेंच इस पर शुक्रवार को सुनवाई करेगी।
याचिका में उत्तर प्रदेश सरकार, शिकायतकर्ता आशुतोष पांडेय, दो नाबालिग पीड़ित, हाईकोर्ट लीगल सर्विस कमेटी और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को पक्षकार बनाया गया है। अधिवक्ता राजर्षि गुप्ता, सुधांशु कुमार और श्री प्रकाश के माध्यम से दाखिल यह मामला कोर्ट नंबर 72 की फ्रेश कॉज लिस्ट में 142वें स्थान पर है।
झूंसी थाने में दर्ज एफआईआर स्वामी और उनके शिष्य पर बीएनएस-2023 की धारा 351(3) तथा छह अन्य लैंगिक अपराध धाराओं के तहत दर्ज है। तुलसी कुंज के आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज की शिकायत के मुताबिक, 14 और 17 साल के दो लड़कों का आश्रम में एक साल से अधिक समय तक बार-बार यौन शोषण किया गया।
माघ मेला के दौरान पीड़ितों ने शिकायतकर्ता को अपनी व्यथा सुनाई और पुलिस सुरक्षा की गुहार लगाई। एफआईआर में दावा है कि महाकुंभ 2025 और माघ मेला 2026 के दौरान भी शोषण जारी रहा, जिसे ‘गुरु सेवा’ बताकर भविष्य का लाभ देने का लालच दिया गया।
लड़कों को बिना कपड़ों के सोने के लिए मजबूर किया गया, धमकियां दी गईं और रातों में शोषण हुआ। हालिया माघ मेले में खड़ी कार और अस्थायी कैंप में भी कुकृत्य किए गए। यदि जमानत न मिली तो पुलिस गिरफ्तारी कर सकती है।
यह मामला धार्मिक संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर रहा है। कोर्ट का फैसला न केवल आरोपी के भविष्य को प्रभावित करेगा बल्कि समाज में विश्वास को भी परखेगा।