
नई दिल्ली। कक्षा 8 की एनसीईआरटी सामाजिक विज्ञान पुस्तक में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ शीर्षक वाले अध्याय को लेकर सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को महत्वपूर्ण सुनवाई करेगा। शीर्ष अदालत ने इस मामले में स्वयं संज्ञान लिया है, जो न्यायिक गरिमा की रक्षा का संकल्प दर्शाता है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और विपुल एम पंचोली की पीठ इस पर विचार करेगी। बुधवार को वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और मुकुल रोहतगी ने सीजेआई के समक्ष मुद्दा उठाया। सीजेआई ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि न्यायपालिका को बदनाम करने की किसी को इजाजत नहीं।
‘संस्था प्रमुख के रूप में मैंने सदैव कर्तव्य निभाया है। किसी को भी न्यायपालिका की छवि खराब करने की अनुमति नहीं दूंगा, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली हो। कानून अपना कार्य करेगा। मैं स्वतः संज्ञान ले रहा हूं।’
एनसीईआरटी ने 24 फरवरी को नई किताब जारी की थी, जिसमें यह विवादास्पद खंड शामिल था। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद एनसीईआरटी ने माफी मांगी और वितरण रोक दिया। स्कूल शिक्षा विभाग ने भी तत्काल निर्देश जारी किए।
एनसीईआरटी के बयान में गलती को अनजानी बताया गया। किसी संस्था की प्रतिष्ठा कम करने का इरादा नहीं था। अध्याय को पुनर्लिखा जाएगा, विशेषज्ञों से सलाह ली जाएगी। संशोधित किताब 2026-27 सत्र से उपलब्ध होगी। एनसीईआरटी ने पश्चाताप जताया और भविष्य में सतर्कता का वादा किया।
यह घटना शैक्षिक सामग्री की समीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठाती है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला पाठ्यक्रम निर्माण में नए मानक स्थापित कर सकता है।