
नई दिल्ली। तमिलनाडु के मदुरै में स्थित थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को सही ठहराया जिसमें नल्लिथोप्पू क्षेत्र में मुस्लिम समुदाय को नमाज केवल रमजान और बकरीद के दौरान ही अदा करने की अनुमति दी गई थी।
मामला वर्षों से चला आ रहा है जहां पहाड़ी पर हिंदू मंदिर और दरगाह दोनों मौजूद हैं। हाईकोर्ट ने न केवल नमाज को सीमित किया बल्कि पशु बलि पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया। याचिकाकर्ता एम इमाम हुसैन ने वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में अपील की।
भूषण ने तर्क दिया कि ट्रायल कोर्ट और प्रिवी काउंसिल ने पहले ही 33 सेंट भूमि को मुस्लिम समुदाय की मान लिया है। ऐसे में नमाज पर पाबंदी धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन है।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट का आदेश सभी पक्षों के हितों को ध्यान में रखकर संतुलित है। कोई हस्तक्षेप जरूरी नहीं। इससे हाईकोर्ट का फैसला लागू रहेगा।
पृष्ठभूमि में जनवरी में एकल पीठ ने अंतरिम आदेश जारी कर दरगाह पर पशु बलि, मांसाहारी भोजन और मांस ढोने पर रोक लगाई थी। यह पहाड़ी की पवित्रता बनाए रखने के प्रयास का हिस्सा था।
यह फैसला धार्मिक स्थलों पर सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने में अदालत की भूमिका को रेखांकित करता है। स्थानीय स्तर पर प्रतिक्रियाएं मिली-जुली हैं लेकिन फिलहाल शांति बनी हुई है। आने वाले समय में और चर्चा की जरूरत है।