
नई दिल्ली। केरल सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। मंगलवार को शीर्ष अदालत ने केरल हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें राज्य के प्रस्तावित ‘नवा केरल सर्वेक्षण’ को रोका गया था। इस फैसले से सरकार अब इस महत्वाकांक्षी डाटा संग्रह अभियान को आगे बढ़ा सकेगी।
हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह केरल छात्र संघ (केएसयू) की याचिकाओं पर सुनवाई के बाद सर्वे पर स्टे लगा दिया था। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले शुरू यह सर्वेक्षण सार्वजनिक धन से चलाया जा रहा राजनीतिक प्रचार है।
हाईकोर्ट ने सर्वे को अवैध करार देते हुए इसके फंडिंग और कार्यान्वयन पर सवाल खड़े किए। अदालत ने कहा कि इसके लिए न तो बजट प्रावधान था और न ही वित्तीय मंजूरी।
राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि कल्याण योजनाओं की प्रभावशीलता जांचने और डाटा एकत्र करने का अधिकार प्रशासन को है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क से सहमति जताई। बेंच ने टिप्पणी की कि करोड़ों खर्च होने वाली योजनाओं का मूल्यांकन सर्वे से करना सरकार का हक है। राजनीतिक आलोचना इसकी मनाही नहीं कर सकती।
अदालत ने न्यायिक हस्तक्षेप पर चिंता जताते हुए कहा कि संवैधानिक उल्लंघन न होने पर संयम बरतना चाहिए। सर्वे जारी रखने की इजाजत देते हुए कोर्ट ने 20 करोड़ के अनुमानित खर्च का विवरण देने का आदेश दिया। अगली सुनवाई 13 अप्रैल को।
यह फैसला प्रशासनिक स्वायत्तता को मजबूत करता है और डाटा आधारित शासन को बढ़ावा देगा।