
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा चुनाव आयोग के विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को महत्वपूर्ण सुनवाई करेगा। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच इस मामले में गहराई से विचार करेगी।
ममता ने अपनी याचिका में चुनाव आयोग पर राजनीतिक पक्षपात का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि वोटर लिस्ट के इस संशोधन से हाशिए पर रहने वाले लाखों मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं, जो विधानसभा चुनाव से पहले राज्य को निशाना बनाने की साजिश है।
विशेष रूप से ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ श्रेणी में आने वाले वोटरों के नाम हटाने पर रोक लगाने की मांग की गई है। महिलाओं के शादी के बाद सरनेम बदलने और स्थानांतरण करने वालों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया था और कहा था कि स्थानीय बोलियों के कारण स्पेलिंग में अंतर सामान्य है, यह वास्तविक मतदाताओं को बाहर करने का आधार नहीं बन सकता।
टीएमसी सांसद डोला सेन और डेरेक ओ’ब्रायन की समान याचिकाओं के साथ यह सुनवाई होगी। असम जैसे राज्यों में ऐसी कार्रवाई न होने का हवाला देकर ममता ने भेदभाव का आरोप लगाया है।
कोर्ट ने भरोसा दिलाया कि व्यावहारिक समाधान निकाला जाएगा। इस फैसले से न केवल बंगाल बल्कि पूरे देश की चुनावी प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।