
नई दिल्ली। सर्वोच्च अदालत ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए केंद्र सरकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नए विनियमों पर रोक लगा दी। कोर्ट ने दोनों को नोटिस जारी कर दिए। इस फैसले से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने इसे स्वागतयोग्य बताते हुए केंद्र को आड़े हाथों लिया।
आनंद दुबे ने कहा कि अदालत ने छात्रों की पुकार सुनी, जो सरकार ने अनसुनी कर दी थी। नए नियमों में आरक्षित वर्ग के छात्र द्वारा सामान्य वर्ग के खिलाफ लगाए गए झूठे आरोपों पर कोई कार्रवाई न होने का प्रावधान अन्यायपूर्ण है। ‘यह समानता के नाम पर भेदभाव है,’ उन्होंने जोर देकर कहा।
2012 के नियम सुचारू रूप से चल रहे थे, फिर इनकी क्या जरूरत? दुबे ने सवाल उठाया। कोर्ट ने तत्काल स्टे देकर पुराने नियम बहाल कर दिए। 19 मार्च को अगली सुनवाई होगी। इससे छात्रों और अभिभावकों को बड़ी राहत मिली, जो छोटे विवादों में फंसने के डर से परेशान थे।
इन्हें ‘काला कानून’ करार देते हुए दुबे ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के विभाग को फटकार लगाई। डॉ. अंबेडकर के संविधान की भावना के विरुद्ध यह कदम है। हम आशा करते हैं कि कोर्ट इन्हें रद्द कर देगा, जहां कानून सबके लिए बराबर हो।