
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान पुस्तक में न्यायपालिका को भ्रष्टाचार का ठप्पा लगाने वाली आपत्तिजनक सामग्री पर कड़ा रुख अपनाते हुए बाजार से इसे वापस लेने का आदेश दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इसे न्यायिक संस्था को कलंकित करने की सुनियोजित साजिश बताया।
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट में मामला उठाया। उन्होंने तर्क दिया कि आठवीं कक्षा के छात्रों को अदालतों में भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाना चिंताजनक है, जो युवाओं के मन में गलत धारणा पैदा कर सकता है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने एनसीईआरटी की ओर से माफी मांगी और बताया कि अध्याय तैयार करने वाले दो व्यक्तियों पर कार्रवाई की गई है। उन्हें यूजीसी या मंत्रालयों से कोई जुड़ाव नहीं मिलेगा। साथ ही, बाजार में गई 32 प्रतियां वापस ले ली गई हैं।
सीजेआई सूर्यकांत ने असंतोष जताया कि केवल दो लोगों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं। उन्होंने कहा, न्यायपालिका पर गोली चली है, इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। संविधान निर्माताओं द्वारा स्थापित विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के संतुलन को खराब करने वाली कोई भी सामग्री बर्दाश्त नहीं।
कोर्ट ने गहन जांच के आदेश दिए हैं ताकि जिम्मेदारों का पता लगे। एनसीईआरटी ने विवादित अध्याय हटाकर नई किताब छापने का वादा किया। 11 मार्च को अगली सुनवाई होगी। यह फैसला शिक्षा सामग्री में निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।