
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया की संवैधानिक वैधता पर गहन सुनवाई की, जिसमें मतदाता सूची में दर्ज लोगों की नागरिकता सत्यापन का मुद्दा केंद्र में रहा। कई याचिकाओं के जरिए इसकी चुनौती दी गई है।
चुनाव आयोग के वकील राकेश द्विवेदी ने 2003 के नागरिकता अधिनियम संशोधन का हवाला देते हुए बचाव किया। उन्होंने बताया कि उस समय किसी ने विरोध नहीं किया था। अदालत ने सवाल किया कि क्या उसी संशोधन से SIR में नागरिकता जांच जरूरी हुई? आयोग ने स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य संविधान के अनुच्छेद 326 के अनुरूप केवल नागरिकों को वोट का अधिकार सुनिश्चित करना है।
SIR आदेश में ‘माइग्रेशन’ शब्द पर अदालत ने कड़ा सवाल उठाया। क्या यह केवल सीमापार घुसपैठ रोकने को है? आयोग ने कहा कि इसमें अंतरराज्यीय और राज्यांतर्गत प्रवास दोनों शामिल हैं। कोर्ट ने टोका कि माइग्रेशन वैध होता है और संविधान हर नागरिक को देशभर घूमने-रहने का अधिकार देता है, इसलिए इसे अवैध ठहराना गलत है।
याचिकाकर्ताओं ने अमेरिकी फैसलों से ड्यू प्रोसेस उल्लंघन का तर्क दिया। द्विवेदी ने जवाब में अमेरिका के दोहरे मापदंडों का जिक्र किया, जैसे ट्रंप का वेनेजुएला नेता को ट्रायल के लिए लाने और ग्रीनलैंड पर कब्जे की बात।
दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा। अगली सुनवाई 28 जनवरी को। बिहार में लाखों मतदाताओं का भविष्य इससे जुड़ा है, जो चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
