
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अधिवक्ता अखिलेश दुबे को धमकी और जबरन वसूली के आरोपों वाले मामले में जमानत प्रदान कर दी। इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने शीर्ष अदालत में अपील की थी।
अखिलेश दुबे के वकील सत्यम द्विवेदी ने बताया कि दुर्भावना से प्रेरित होकर एक ही दिन में छह मुकदमे ठोक दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी की शिकायतों की बारीकी से जांच की और पाया कि दुबे का कोई आपराधिक अतीत नहीं है। पहली एफआईआर के बाद बाकी दर्ज हुईं, जिनमें से कई बिना सबूत के लगीं।
हाईकोर्ट ने पिछले साल अक्टूबर में कानपुर के बर्रा थाने के बीएनएस धाराओं वाले केस में जमानत अस्वीकार की थी। जस्टिस संतोष राय ने अपराध की गंभीरता, गवाहों पर दबाव और वकील पद के दुरुपयोग की आशंका का हवाला दिया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट में 47 मामलों में से कई के बिना जांच साक्ष्य बताए गए।
यह फैसला न केवल दुबे को राहत देता है बल्कि बाकी मामलों में भी जमानत की उम्मीद जगाता है। द्विवेदी ने कहा कि अदालत ने तर्कों को स्वीकार किया। यह मामला झूठे मुकदमों के खिलाफ न्यायिक सुरक्षा को रेखांकित करता है, खासकर वकीलों के लिए। दुबे की रिहाई से पुलिसिया जांच पर सवाल उठे हैं।