
सोशल मीडिया पर छाईं एक वीडियो ने पूरे देश को झकझोर दिया है। सनी धीमान ने खुले तौर पर भारत की न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि हिंदुओं और मुसलमानों के लिए न्याय की दो अलग-अलग आंखें हैं। मुस्लिम पक्ष की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट फटाफट सुनवाई करता है, लेकिन हिंदू मामले सालों तक लटके रहते हैं।
धीमान ने कई उदाहरण दिए। मस्जिद विवादों में तुरंत रोक लग जाती है, लेकिन मंदिरों पर कब्जे हटाने की मांग पर कोई कार्रवाई नहीं। अयोध्या फैसले के बाद भी काशी और मथुरा जैसे स्थानों पर हिंदू पक्ष को इंसाफ के लिए तरसना पड़ रहा है। उनका वीडियो लाखों बार देखा जा चुका है और #न्यायकीदोआंखें ट्रेंड कर रहा है।
कानूनी विशेषज्ञों का मत दोहरा है। कुछ इसे सामान्य देरी बता रहे हैं, तो कुछ व्यवस्था में पूर्वाग्रह मानते हैं। धीमान का कहना है कि यह पैटर्न साफ दिखता है और सुधार जरूरी है। राजनीतिक दलों ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
यह विवाद धार्मिक सद्भाव पर सवाल खड़े कर रहा है। धीमान की आवाज ने उन लाखों लोगों को बोलने का हौसला दिया है जो मानते हैं कि कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए। क्या न्यायपालिका इस चुनौती का जवाब देगी? आने वाले दिनों में इसका असर साफ दिखेगा। देश एक समान न्याय की उम्मीद में टिका है।