
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के सुंदरबन में बाघों का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा। एक हफ्ते के अंदर ही दूसरी बार बाघ के हमले में एक मछुआरे की जान चली गई। दक्षिण 24 परगना जिले के गोसाबा थाना क्षेत्र के छोटा मोल्लाखली कालिदासपुर गांव के निवासी 45 वर्षीय रामपद बर्मन मंगलवार को जंगल में केकड़े पकड़ने गए थे।
आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, रामपद और उनके साथी जरूरी अनुमति लेकर जंगल में प्रवेश कर चुके थे। घने जंगल में अचानक एक बाघ ने उन पर धावा बोल दिया। हमले में रामपद बुरी तरह जख्मी हो गए। साथी मछुआरों ने हिम्मत से बाघ को भगाया और उन्हें नाव से गांव लाकर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
सुंदरबन कोस्टल पुलिस स्टेशन की टीम घटनास्थल पर पहुंची और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। दक्षिण 24 परगना (दक्षिण) डिवीजन की डीएफओ निशा गोस्वामी ने बताया कि मृतक नियमों का पालन कर रहे थे। ‘हम लगातार जागरूकता अभियान चला रहे हैं ताकि जंगल में सावधानी बरती जाए।’
सुंदरबन में बाघों के हमले आम हैं। रोजगार के लिए लोग जंगल में जाते हैं, जहां खतरा हमेशा मंडराता रहता है। रामपद के परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैं। 8 फरवरी को पाथरप्रतिमा के कलास द्वीप के पास भी ऐसा ही हादसा हुआ था, जहां बाघ ने एक युवक को पत्नी के सामने ही खींच लिया था।
वन्यजीव संरक्षण के कारण बाघों की संख्या बढ़ी है, लेकिन इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष भी तेज हो गया। विशेषज्ञ सुझाते हैं कि गश्त बढ़ाई जाए, वैकल्पिक रोजगार दिए जाएं और जागरूकता को मजबूत किया जाए। यह सिलसिला कब थमेगा, यही सवाल अब स्थानीयों के जेहन में है।