
भारत के उत्तराखंड में स्थित अरकेश्वर महादेव मंदिर में हर साल मकर संक्रांति के दिन एक चमत्कारिक दृश्य देखने को मिलता है। सूर्य देव भगवान शिव पर स्वयं राजतिलक लगाते नजर आते हैं। यह अद्भुत घटना भक्तों को आकर्षित करने का प्रमुख कारण बनी हुई है।
अल्मोड़ा जिले के ऊंचे पहाड़ों पर बसा यह प्राचीन मंदिर करीब 7500 फुट की ऊंचाई पर विराजमान है। संक्रांति की सुबह सूर्योदय के समय पहली किरणें सीधे शिवलिंग पर पड़ती हैं, जिससे लिंग पर सुनहरा तिलक चमकने लगता है। यह नजारा कुछ मिनटों तक बना रहता है और देखने वाले भक्त झूम उठते हैं।
मंदिर के पुजारी बताते हैं कि यह खगोलीय गणना पर आधारित है। प्राचीन वास्तुकारों ने मंदिर को इस तरह बनाया कि उत्तरायण शुरू होने पर सूर्य की किरणें ठीक इसी बिंदु पर पहुंचें। स्थानीय कथाओं में कहा जाता है कि शिवजी ने इसी स्थान पर तपस्या की थी और सूर्य उनके परम भक्त हैं।
इस साल भी हजारों श्रद्धालु पैदल यात्रा कर मंदिर पहुंचे। बर्फबारी के बावजूद भजन-कीर्तन और विशेष पूजन का आयोजन हुआ। तिल, गुड़ और खिचड़ी का प्रसाद वितरित किया गया। यह उत्सव न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर देता है।
ऐसी अनूठी परंपराएं भारत की आध्यात्मिक धरोहर को जीवंत रखती हैं। मकर संक्रांति पर सूर्य-शिव का यह मिलन भक्तों को नई ऊर्जा प्रदान करता है।